Skip to main content

Posts

किसै न बदै आपि अहंकारी , धरम राइ तिसु करे खुआरी

रामदेव  के बयान (२७ मई अंक )आईएमए ने जताया विरोध- सम्पादकीय में अभिव्यक्त विचार मंथन एवं विरोध से हम भारत धर्मी समाज के लोग सहमत हैं। आहत हैं आलमी स्वास्थ्य आपात काल के इस कोरोना आपद काल में जबकि तमाम चिकित्सा पद्धतियों को एक जूट हो इस आलमी महामारी का मुकाबला करना था ,रामदेव जी के गैर -ज़रूरी आपत्ति जनक परपीड़क बयानातों से हम बुरी तरह आहत हैं। हमारी संवेदनाएं अहर्निस परिवार से अपनों से एक मुद्द्त से  दूर  हुए , दमघोंटू परसनल किट ओढ़े उन कोरोना यौद्धाओं के संग हैं जो लोगों को बचाते -बचाते चल बसे।  अब जबकि आयुष मंत्रालय भी है परम्परागत चिकित्साओं को हर ओर से बढ़ावा भी दिया जा रहा है। यह बेहद दुर्भाग्य पूर्ण हैं रामदेव जी अपनी गलती क़ुबूल नहीं कर रहे हैं ,मामले को तूल दे रहे हैं। जबकि आज अवसाद और खिन्नता के इस दौर में समेकित चिकित्सा ,तन -मन की सम्प्पूर्ण चिकित्सा की दरकार है। एलोपैथी -आयुर्वेद के परस्पर संवर्धन के लिए सहजीवन की महती आवश्यकता है। शत्रु मामूली नहीं है बहरूपिया सार्स -कोव -२ अनेकांश रूप बदल अपने अस्तित्व को बनाये रखने कायम रखने मे...

ॐ सच्चिदानंद परब्रह्मा ,पुरुषोत्तमा परमात्मा , श्रीभगवती समेत ,श्री -भगवते नम : हरी ॐ तत् सत् हरी ॐ तत् सत् हरी ॐ तत् सत्

  The Power Of The Moola Mantra (The Oneness ) मूल मंत्र की शक्ति (एकत्व ) https://www.youtube.com/watch?v=9ebpgVj3Wtg The Power Of The Moola Mantra (The Oneness ) मूल मंत्र की शक्ति (एकत्व ) Whenever you chant the Moolamantra even without knowing the meaning of it ,that itself carries power .But when you know the meaning and chant with that feeling in your heart then the energy will flow million times more powerful . जब भी आप मूल मंत्र का जाप करते हैं भले आपको इसका अर्थ- बोध (पता) न हो ,तब भी यह शक्ति लिए रहता है। शक्ति दायक होता है। और यदि मतलब भी इसका पता हो और हृदय उस भाव की अनुभूति और एहसास लिए हो तब ऊर्जा का यह परवाह दस लाख गुना हो जाता है। The Mantra is like calling a name .Just like when you call a person he comes and makes you feel his presence ,the same manner when you chant this Mantra ,the supreme energy manifests everywhere around you . यह किसी को नाम से बुलाने ,नाम बोलकर आवाहन करने के समान है। जैसे किसी व्यक्ति को पुकारने पर वह आ जाए और अपनी मौजूदगी का कराए ,ऐसे ही जब...

ॐ सच्चिदानंद परब्रह्मा ,पुरुषोत्तमा परमात्मा , श्रीभगवती समेत ,श्री -भगवते नम : हरी ॐ तत् सत् हरी ॐ तत् सत् हरी ॐ तत् सत्

https://www.youtube.com/watch?v=T4CLazqxslc ॐ सच्चिदानंद परब्रह्मा ,पुरुषोत्तमा परमात्मा , श्रीभगवती समेत ,श्री -भगवते नम : हरी ॐ तत् सत्   हरी ॐ तत् सत्   हरी ॐ तत् सत्   

संस्कृति -संविधान है इक नाम अब , देते देते गालियां भी चुक गईं

बदज़ुबानी उसने की जो ,बढ़ गई , रंजिशें आपस की बेहद बढ़ गईं।   जैसे थे वह  तुर्क हिन्दू अब नहीं, फासले और दूरियां अब बढ़ गईं।  जिस सियासत ने किया सौदा मज़हब , देखते ही देखते वह बढ़ गई।  जो थे ओछे और भी ओछे हुए , दरमियान उनके  हदें सब ढह गईं।  संस्कृति -संविधान है  इक नाम अब , देते देते गालियां भी चुक गईं।                             -------------वीरुभाई        -------------- ठाकुर दास सिद्ध -विश्व हिंदी संस्थान ,कनाडा             (ग़ज़ल )   आग जो उसने लगाईं बढ़ गई , मुफ़लिसों की अब रुलाई बढ़ गई।  झौंपड़े जैसे थे वैसे ही नहीं , और महलों की ऊंचाई बढ़ गई।  जो यहां ईमान बेचा देखिए , दूसरे पल से कमाई बढ़ गई।  जो थे छोटे और भी छोटे हुए , बीच थी जो आज खाई बढ़  गई।  महफ़िलों में खूब खनके ज़ाम  पर , अपने दुःख की बात आई बढ़ गई।  'सिद्ध' समझाने गए उसके लिए , वो नहीं समझा ढिठाई बढ़ गई।  ---------------...

यूपी के हैं तीन चोर ,मुंशी गुप्ता जुगलकिशोर

दैनिक जागरण २९ सितंबर २०२० में प्रकाशित प्रखर सम्पादकीय "किसानों के फ़र्ज़ी हितैषी "के सन्दर्भ में पाठकनामा के लिए मेरे उदगार सम्प्रेषित हैं : बेहद की गैर -यकीनीं बात है ,कोई किसान अपने ट्रेक्टर की होली जला सकता है,और उसे दूरदराज़ से लादकर राजपथ (इंडिय-गेट के दिल )के पास लाकर दहन करने का ख्याल भी मन में ला सकता है ट्रेक्टर हासिल करना थ्रेशर खरीदना ,पराली अलग करके खाद हेतु छिड़काव करने वाली मशीन रखना हर किसान का सपना होता है। पहले ये सपना बैलों की जोड़ी थी यहां तक के यही बैलों की जोड़ी कांग्रेस का चुनाव चिन्ह थी। मैं उन दिनों बाल्यावस्था भुगता रहा था बुलंदशहर प्रवास के दौरान मेरे एक मुंह बोले मामा ने एक कविता लिखी थी -दो बैलों की ओट सांड फिर आया रे।  आज यही सांड छुट्टा घूम रहा है संसद से सड़क था अराजकता का जनक बना।  उस दौर में उत्तरप्रदेश कांग्रेस का गढ़ था तीन हस्तियां अहम थीं -मुंशी (के ऍफ़ ),जुगलकिशोर ,गुप्ता (सी. वी. ) एक और कविता उसी दौर की आज भी मुझे कंठस्थ है : यूपी के हैं तीन चोर ,मुंशी गुप्ता जुगलकिशोर  आज इन चोरों की संख्या घटते बढ़ते पचास के आसपास स्थिर हो गई है। इनम...

भाव बोध सहित :अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥1।।

भाव बोध सहित : अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥1।। (मधुराधिपते अखिलं मधुरम्) अर्थ (Meaning in Hindi): अधरं मधुरं – श्री कृष्ण के होंठ मधुर हैं वदनं मधुरं – मुख मधुर है नयनं मधुरं – नेत्र (ऑंखें) मधुर हैं हसितं मधुरम् – मुस्कान मधुर है हृदयं मधुरं – हृदय मधुर है गमनं मधुरं – चाल भी मधुर है मधुराधिपते – मधुराधिपति (मधुरता के ईश्वर श्रीकृष्ण) अखिलं मधुरम् – सभी प्रकार से मधुर है वचनं मधुरं चरितं मधुरं, वसनं मधुरं वलितं मधुरम्। चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥2।। (मधुराधिपते अखिलं मधुरम्) अर्थ (Meaning in Hindi): वचनं मधुरं – भगवान श्रीकृष्ण के वचन (बोलना) मधुर है चरितं मधुरं – चरित्र मधुर है वसनं मधुरं – वस्त्र मधुर हैं वलितं मधुरम् – वलय, कंगन मधुर हैं चलितं मधुरं – चलना मधुर है भ्रमितं मधुरं – भ्रमण (घूमना) मधुर है मधुराधिपते – मधुरता के ईश्वर श्रीकृष्ण (मधुराधिपति) अखिलं मधुरम् – आप (आपका) सभी प्रकार से मधुर है वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः, पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ। न...