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जयंती: जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर श्रद्धांजलि , पीएम मोदी बोले- लोगों को आज भी प्रेरित करते हैं उनके विचार

जयंती: जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर श्रद्धांजलि , पीएम मोदी बोले- लोगों को आज भी प्रेरित करते हैं उनके विचार

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https://www.patrika.com/opinion/dr-shyama-prasad-mookerjee-s-120th-birth-anniversary-is-today-6934537/


Twभारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज जयंती है। 6 जुलाई 1901 में कलकत्ता में उनका जन्म हुआ था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी बैरिस्टर और शिक्षाविद थे। उन्होंने पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में उद्योग और आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य किया। हालांकि, नेहरू-लियाकत समझौते के विरोध में मुखर्जी ने नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मदद से उन्होंने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की 1980 में यही भारतीय जनता पार्टी बन गई।पीएम मोदी ने जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम ने कहा कि मुखर्जी के विचार आज भी लोगों को ताकत देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया,  ‘मैं श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें नमन करता हूं। उनके ऊंचे आदर्श लाखों लोगों को आज भी प्रेरित करते रहते हैं। डॉक्टर मुखर्जी ने भारत की एकत और प्रगति के लिए अपना जीवन खपा दिया। उन्होंने एक असाधारण विद्वान के रूप में भी अपनी पहचान बनाई।’

मुखर्जी का भारत को सशक्त बनाने में अहम योगदान- शाह 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचार चिरकाल तक प्रासंगिक रहेंगे।शाह ने ट्वीट कर कहा, ‘‘डॉ. मुखर्जी ने अपनी दूरदर्शी सोच से देश में शिक्षा, स्वास्थ्य व औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखने और सामरिक दृष्टि से भारत को सशक्त बनाने में अहम योगदान दिया। उनके सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचार चिरकाल तक प्रासंगिक रहेंगे। ऐसे अप्रतिम राष्ट्रनायक की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।’’

केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने दी श्रद्धांजलि

भारतीय जनता पार्टी के नेता देश भर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि जनसंघ के इस संस्थापक ने देश की एकता एवं अखंडता के लिए अपने पूरे जीवन को न्यौछावर कर दिया। वहीं दिल्ली में केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन, दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता एवं भाजपा के अन्य नेताओं ने शहीदी पार्क जाकर मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी और उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण किया।

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के खिलाफ थे मुखर्जी

श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष राज्य के दर्जा के खिलाफ थे और उन्होंने राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा बताते हुए अनुच्छेद 370 का पुरजोर विरोध किया था। संसद के भीतर और बाहर इसके खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़ी। भारतीय जनसंघ का मकसद इसे तत्काल समाप्त करना था। मुखर्जी ने 26 जून 1952 को अपने लोकसभा भाषण में इस प्रावधान के खिलाफ आवाज उठाई। राज्य का अलग झंडा होने और प्रधानमंत्री के प्रवाधान पर मुखर्जी ने कहा था 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।' मोदी सरकार ने 2019 में इसको समाप्त कर दिया।  मुखर्जी 1943 से 1946 तक अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष भी रहे। 1953 में जम्मू और कश्मीर पुलिस की हिरासत में उनकी मृत्यु हो गई। 


Conversation

Delhi: Union Minister Dr Harsh Vardhan, Delhi BJP Chief Adesh Kumar Gupta and other BJP leaders pay tribute to Dr Shyama Prasad Mukherjee, on his birth anniversary at Shahidi Park.
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इस शास्त्र का 'पूर्वमीमांसा' नाम इस अभिप्राय से नहीं रखा गया है कि यह उत्तरमीमांसा से पहले बना  । 'पूर्व' कहने का तात्पर्य यह है कि कर्मकांड मनुष्य का प्रथम धर्म है ज्ञानकांड का अधिकार उसके उपरान्त आता है। मीमांसा का तत्वसिद्धान्त विलक्षण है । इसकी गणना अनीश्वरवादी दर्शनों में है । षड्दर्शन षड्दर्शन उन भारतीय दार्शनिक एवं धार्मिक विचारों के मंथन का परिपक्व परिणाम है जो हजारों वर्षो के चिन्तन से उतरा और हिन्दू (वैदिक) दर्शन के नाम से प्रचलित हुआ। इन्हें आस्तिक दर्शन भी कहा जाता है। दर्शन और उनके प्रणेता निम्नलिखित है। १ पूर्व मीमांसा: महिर्ष जैमिनी २ वेदान्त (उत्तर मीमांसा): महिर्ष बादरायण ३ सांख्य: महिर्ष कपिल ४ वैशेषिक: महिर्ष कणाद ५ न्याय: महिर्ष गौतम ६ योग: महिर्ष पतंजलि वेद ज्ञान को समझने व समझाने के लिए दो प्रयास हुए: १. दर्शनशास्त्र २. ब्राह्यण और उपनिषदादि ग्रन्थ। ब्राह्यण और उपनिषदादि ग्रन्थों में अपने-अपने विषय के आप्त ज्ञाताओं द्वारा अपने शिष्यों, श्रद्धावान व जिज्ञासु लोगों को  मूल वैदिक ज्ञान सरल भाषा में विस्तार से समझाया है। यह ऐसे ही है जैसे आज के युग में...

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भाव बोध सहित : अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥1।। (मधुराधिपते अखिलं मधुरम्) अर्थ (Meaning in Hindi): अधरं मधुरं – श्री कृष्ण के होंठ मधुर हैं वदनं मधुरं – मुख मधुर है नयनं मधुरं – नेत्र (ऑंखें) मधुर हैं हसितं मधुरम् – मुस्कान मधुर है हृदयं मधुरं – हृदय मधुर है गमनं मधुरं – चाल भी मधुर है मधुराधिपते – मधुराधिपति (मधुरता के ईश्वर श्रीकृष्ण) अखिलं मधुरम् – सभी प्रकार से मधुर है वचनं मधुरं चरितं मधुरं, वसनं मधुरं वलितं मधुरम्। चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥2।। (मधुराधिपते अखिलं मधुरम्) अर्थ (Meaning in Hindi): वचनं मधुरं – भगवान श्रीकृष्ण के वचन (बोलना) मधुर है चरितं मधुरं – चरित्र मधुर है वसनं मधुरं – वस्त्र मधुर हैं वलितं मधुरम् – वलय, कंगन मधुर हैं चलितं मधुरं – चलना मधुर है भ्रमितं मधुरं – भ्रमण (घूमना) मधुर है मधुराधिपते – मधुरता के ईश्वर श्रीकृष्ण (मधुराधिपति) अखिलं मधुरम् – आप (आपका) सभी प्रकार से मधुर है वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः, पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ। न...

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